हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जामेअतुल ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की प्रचार एवं सांस्कृतिक मामलों की उपाध्यक्ष सुश्री मासूमा शरीफ़ी ने एक विस्तृत बातचीत में «सफ़ीराने ज़ैनबी» के नाम से इराक भेजी गई प्रचारक महिलाओं की व्यापक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया और दुनिया के सबसे बड़े शिया धार्मिक जमावड़े के बीच एक महान सांस्कृतिक अभियान के आयोजन की जानकारी दी।
जामेअतुल ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की प्रचार एवं सांस्कृतिक मामलों की उपाध्यक्ष ने यह बताते हुए कि ऐतिहासिक महत्वपूर्ण अवसरों पर तथ्यों और वास्तविकताओं को स्पष्ट करना हर धार्मिक विद्यार्थी का दायित्व है, कहा कि हमारी प्रचारक महिलाओं ने हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा, जो आशूरा के संदेश की संदेशवाहक थीं, का अनुसरण करते हुए सीमित संसाधनों और भीषण गर्मी के बावजूद अपने धार्मिक दायित्व को पूरा करने में एक क्षण की भी लापरवाही नहीं की। उन्होंने दिखाया कि धार्मिक शिक्षण केंद्र केवल चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के बीच और उसके विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सफ़ीराने ज़ैनबी की व्यावहारिक गतिविधियों में विभिन्न प्रकार के प्रभावशाली सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे, जिन्हें तीन मुख्य क्षेत्रों «बच्चे और किशोर», «धार्मिक ज्ञान और जागरूकता» तथा «इबादत» में आयोजित किया गया।
आमने-सामने धार्मिक प्रचार; बच्चों के साथ काम से लेकर धार्मिक सवालों के जवाब तक
बच्चों और किशोरों से संबंधित गतिविधियों के क्षेत्र में प्रचारक महिलाओं ने पैदल यात्रा के मार्ग में «बच्चों के साथ काम» के स्टॉल लगाए और «किशोर मंडलियां» स्थापित कीं, जिससे एक ऐसा वातावरण तैयार हुआ जो मनोरंजक होने के साथ-साथ ज्ञानवर्धक भी था।
«सहानुभूति का टावर» जैसे ज्ञानवर्धक खेलों के आयोजन का उद्देश्य धार्मिक और नैतिक उच्च अवधारणाओं को खेल के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना था।
इस कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता इराकी मौकिबों के साथ रचनात्मक सहयोग रहा। यहां ईरानी महिला प्रचारकों ने अपनी इराकी समकक्षों के साथ मिलकर बच्चों के साथ काम किया और कला तथा खेल के माध्यम से दोनों राष्ट्रों के बीच संबंधों को और मजबूत किया।
नेतृत्व के बयानों की व्याख्या से लेकर सूरह फ़त्ह के लाखों लोगों द्वारा सामूहिक ख़त्म तक
जागरूकता बढ़ाने के क्षेत्र में मुख्य ध्यान सर्वोच्च नेता के रणनीतिक बयानों की व्याख्या पर रहा। इस भाग में महत्वपूर्ण बात विलायत-ए-फ़क़ीह के स्थान और महत्व के प्रति विश्वास को और गहरा करना था। इसके साथ शहीद नेता और सर्वोच्च नेता के चित्र वितरित किए गए, जिससे ज़ायरीन की भावनात्मक श्रद्धा को राजनीतिक और क्रांतिकारी चेतना से जोड़ा गया।
प्रचार एवं सांस्कृतिक मामलों की उपाध्यक्ष के अनुसार, प्रचारक महिलाओं ने यात्रा की थकान के बावजूद धैर्य और लगन के साथ किशोरों के धार्मिक सवालों और वैचारिक शंकाओं का जवाब दिया। इस सिलसिले में जामेअतुल ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शिक्षिकाएं और प्रचारक महिलाएं मौकिबों में तैनात रहीं और धार्मिक आदेशों की जानकारी देने तथा परामर्श प्रदान करने का कार्य किया, जिससे ज़ायरीन की धार्मिक और ज्ञान संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया गया।
तेज़ धूप के नीचे सामूहिक तवस्सुल
इस यात्रा का इबादती और आध्यात्मिक पक्ष भी बेहद शानदार रहा। सूरह फ़त्ह की सामूहिक तिलावत की आवाज़, जो यात्रा के मार्ग और पैदल यात्रियों के मौकिबों में बार-बार सुनाई देती रही, इस्लामी जगत की बड़ी सफलताओं की आशा का संदेश देती रही। इस अभियान को सूरह फ़त्ह के लाखों लोगों द्वारा सामूहिक ख़त्म के आयोजन और वितरण के माध्यम से चरम पर पहुंचाया गया, जिसने ज़ायरीन के दिलों को एक-दूसरे से जोड़ दिया।
हज़रत उम्मुल बनीन (स.) की नज़र और दस्तरख़्वान का आयोजन भी इन कार्यक्रमों में विशेष आकर्षण का कारण बना।
प्रचार एवं सांस्कृतिक मामलों की उपाध्यक्ष ने अपने वक्तव्य के अंत में इस धार्मिक अभियान को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस रूहानी यात्रा के अंत में इराकी मौकिब संचालक स्वयं आगे आए और उपहार देकर प्रचारक महिलाओं का सम्मान किया। इन दृश्यों ने साबित किया कि धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वाली बहनों ने खाली हाथ, लेकिन ईमान से भरे दिलों के साथ, किसी भी तरह की सुविधाओं के अभाव में अपने धार्मिक दायित्व को सर्वोत्तम ढंग से पूरा किया और यह साबित कर दिया कि किसी भी परिस्थिति में धर्म के प्रचार का झंडा झुकने नहीं दिया जाएगा।
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